فهد الباشا

1ـ  كيف  لـ «النهضة » ان  تستعيد  أملا  افتقده الناس فيها، بعدما تعثرت  بالنزعات  الفردية،  والنزاعات الداخلية، وتبعثرت نتائج جهادها الطويل؟ لا  يستعاد  امل  ظل  يتراجع على  مدى عقود من التاريخ  الا بقيادة  استثنائية، تؤثر،  في  استنارتها، ان  يكون  لها  مكان  اقامة  في التاريخ  على اقامتها في  أفخم  الدور  والقصور.  حسبكم  حافزا  على  ذلك، وحسبكم  دليلا ساطعا وقدوة  هادية،  قائد  معروف،  هداه  صدقه  مع  نفسه  وايمانه  ب «صحة  عقيدته » الى  ان  يعطي من  دون  أن  يأخذ  من دنياه الا كفاف  حاجته. فحقق،  بعلامته الفارقة  هذه  في  هوية  قيادته،  انجازا  يحاكي  الاعجاز. بلى،  بلى،  لا تنهض  «نهضة » تعثرت،  ولا  تنهض شعوب  من  تعثيرها الا بقدوة  قادتها. وبانتظار  ان  تحسنوا،  ايها  الاحرار،  الاختيار. نحييكم  على رجاء الحق والجهاد.

2ـ رفع  الدعم  عن  المحروقات، لو  حصل،  سيشكل دعما لاشعال الحرائق.  فاحسبوها يا عقلاء الحكم.

3ـ بينك  وبين  الوحش  الهاجم  عليك  مفترسا  خيار  القاتل  أو  المقتول.  حكامك  الفاسدون  هم  الوحوش.  ومن  توهم ان  مع  الوحش  خيارا  آخر  فبخياره  مقتول  مقتول.

4ـ  عبثا  تستنهض  الى الثورة  على  الظالمين، على الفاسدين  من  نشأ  على  انه لا يصيبه الا ما كتب  له رب العالمين.